वीर भगत सिंह के गीत:
Bhagat Singh: Ek Amar Krantikari Ki Adbhut Kahani
1. प्रारंभिक जीवन
जन्म और परिवार: भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के गांव बंगा में हुआ था। उनका परिवार सामान्य था, लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें नैतिक मूल्यों और देशप्रेम के प्रति सजाग बनाया।
2. जलियांवाला बाग और प्रभाव
घटना का विवरण: 1919 में, जलियांवाला बाग में हुई निर्दयता की घटना ने भगत सिंह के मन में गहरा प्रभाव डाला। इस घटना ने उनकी देशप्रेमी भावनाओं को और भी मजबूत किया।
3. क्रांतिकारी संगठनों में शामिल होना
HSRA में योगदान: भगत सिंह ने क्रांतिकारी संगठन हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) में शामिल होने का फैसला किया। यहां से उनका संघर्ष और स्वागत हुआ और वे देश के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने लगे।
4. केंद्रीय विधायिका सभा में बम फैसला
इतिहासी पल: 8 अप्रैल 1929 को, भगत सिंह ने केंद्रीय विधायिका सभा में बम फेंकने का प्रयास किया। उन्होंने "इंक़लाब ज़िन्दाबाद" के नारे के साथ इस हमले को किया और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई।
5. लाहौर साजिश केस
क्रांतिकारी संघटना: भगत सिंह, राजगुरू, और सुखदेव ने लाहौर साजिश केस में भी भाग लिया। इस केस में उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था, लेकिन वे न्याय प्राप्त करने के लिए संघर्ष करते रहे।
6. भूख हड़ताल
जेल में आन्दोलन: जेल में बंद रहते हुए, भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ भूख हड़ताल का आयोजन किया। इस आंदोलन ने उन्हें और उनके साथी क्रांतिकारियों को समाज में लोकप्रियता दिलाई।
आख़िरी दिन: 23 मार्च 1931 को, भगत सिंह, राजगुरू, और सुखदेव को तलवारों से लहूलुहान मौत दी गई। उनका त्याग और बलिदान आज भी भारत के लोगों के दिलों में अमर हैं। वे 'शहीद' भगत सिंह के रूप में याद किए जाते हैं।
एक उदाहरण: भगत सिंह का जीवन एक महान क्रांतिकारी बनने का एक उदाहरण है। उनका बलिदान और वीर गाथा आज भी नई पीढ़ियों को प्रेरित करती है।
वीर शहीदों का सम्मान: भारत सरकार ने भगत सिंह, राजगुरू, और सुखदेव को राष्ट्रीय वीर और शहीदों के रूप में सम्मानित किया है। उनका नाम हमेशा देश की स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक रहेगा।
विश्व स्तर पर महत्व: भगत सिंह का महत्व केवल भारत में ही नहीं, वरन् पूरे विश्वभर में है। उनका संघर्ष और समर्पण एक महत्वपूर्ण संदेश है कि सत्य, सामाजिक न्याय, और देशप्रेम हमेशा विजयी होते हैं। वे आज भी लोगों के दिलों में महापुरुष के रूप में बसे हुए हैं।